संवाददाता सूरज सागर बरेली।
रिछा/बरेली। बहेड़ी स्थित संघटक राजकीय महाविद्यालय में काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह का भव्य आयोजन किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ के के तिवारी जी ने अमर बलिदानी ठाकुर रोशन सिंह, पं.राम प्रसाद बिस्मिल , असफ़ाक उल्ला खा और राजेंद्र लाहिड़ी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया। इस अवसर पर सभी संकाय के सहायक प्रोफेसर तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी गण उपस्थित हुए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए “काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी वर्ष” पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी संकायों के विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।कार्यक्रम में व्याख्यान सत्र का आयोजन भी किया गया जिसमें राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ रश्मि शर्मा ने अपने विचार प्रस्तुत किया। इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ अभयजीत सरोज जी काकोरी ट्रेन एक्शन का ऐतिहासिक महत्व पर व्याखान दिया। अंग्रेजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ सोनम नारायण ने काकोरी ट्रेन एक्शन का भारतीय साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ा उस पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य महोदय ने बताया कि “काकोरी ट्रेन एक्शन” जैसा कि आप सभी को ज्ञात है काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना 9 अगस्त 1925 को लखनऊ से 15 किलोमीटर पहले पड़ने वाले काकोरी रेलवे स्टेशन के पास घटित हुई थी। आज जिसके 100 वर्ष पूर्ण हो रहे है। हमारे प्रदेश के यशस्वी, तपस्वी माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी वर्ष को पूरे एक वर्ष तक मानने का आवाहन किया है , इस शताब्दी वर्ष समारोह में हम देश के अपने प्रदेश के तथा अपने जनपद के सभी ज्ञात अज्ञात वीर सेनानी , शहीदों, क्रांतिकारियों , तथा आजाद भारत में देश की सुरक्षा, अखंडता, प्रभुता ,संप्रभुता की रक्षा करते हुए जो हमारे सेना के वीर जवानों ने मातृ भूमि पर अपने प्राणों की आहुति दी है , आज उनको भी नमन करने का यह अवसर मा. मुख्यमंत्री जी ने काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी वर्ष के रूप में अवसर प्रदान किया है।

आज हम अमर बलिदानियों को नमन करने तथा उनके प्रति आदर, सम्मान का भाव व्यक्त करने हेतु तथा युवा पीढ़ी शहीदों के त्याग बलिदान समर्पण के भाव को आत्मसाथ कर अपने चरित्र का निर्माण करे। प्राचार्य महोदय ने हिंदी के महान कवि माखन लाल चतुर्वेदी की अमर कविता “पुष्प की अभिलाषा” की पक्तियों (” मुझे तोड़ लेना वनमाली , उस पथ पर तुम देना फेंक। जिस पथ पर शीश चढ़ाने, जाए वीर अनेक।।) से वाणी को विराम दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया तथा डॉ अन्नत प्रकाश जी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।